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फतेहाबाद में फसल मुआवजा घोटाला: सरकारी स्कीम की रकम रिश्तेदारों के खातों में डाली गई, तहसीलदार समेत 27 पर केस

फतेहाबाद के गांव बड़ोपल में खरीफ सीजन 2021 की खराब फसल के लिए सरकार ने किसानों को राहत देने के मकसद से वर्ष 2022 में मुआवजा जारी किया था। लेकिन इस राहत योजना को लूटने के...

Fatehabad News: फतेहाबाद के गांव बड़ोपल में खरीफ सीजन 2021 की खराब फसल के लिए सरकार ने किसानों को राहत देने के मकसद से वर्ष 2022 में मुआवजा जारी किया था। लेकिन इस राहत योजना को लूटने के लिए तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से एक बड़ा घोटाला अंजाम दे डाला।

सीएम फ्लाइंग की जांच में सामने आया है कि मुआवजा की लाखों की रकम असल किसानों के बजाय अधिकारियों के निजी सहायकों, रिश्तेदारों और जानकारों के खातों में ट्रांसफर की गई। इस घोटाले में तत्कालीन तहसीलदार रणविजय सुल्तानिया, नायब तहसीलदार राजेश कुमार, पटवारी राजेन्द्र प्रसाद और कानूनगो सहित कुल 27 लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

सीएम फ्लाइंग की जांच से हुआ खुलासा

शिकायत सीएम फ्लाइंग के सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की ओर से दी गई थी। पुलिस ने सभी आरोपियों पर धोखाधड़ी (fraud), साजिश (criminal conspiracy) और सरकारी धन के गबन (embezzlement) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों में फतेहाबाद के पूर्व तहसीलदार रणविजय सुल्तानिया भी शामिल हैं, जो पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव के भतीजे हैं।

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जांच में पता चला कि राज्य सरकार ने खरीफ 2021 में खराब हुई फसलों की भरपाई के लिए गांव बड़ोपल के किसानों को मुआवजा देने के उद्देश्य से तहसीलदार फतेहाबाद के खाते में 4.25 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इसमें से करीब 3.51 करोड़ रुपये किसानों को बांटे गए और बाकी 73.81 लाख रुपये वापिस भेजे गए। लेकिन इस वितरण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।

निजी दफ्तर में तैयार हुई फर्जी लिस्ट

राजेंद्र प्रसाद नामक पटवारी ने अपने निजी सहायकों कमलजीत और सुन्दर उर्फ बिल्ला की मदद से फर्जी मुआवजा सूची (compensation list) तैयार करवाई। ये काम सरकारी दफ्तर की बजाय पुराने बस अड्डे के पास उनके निजी कार्यालय में किया गया।

इस लिस्ट में वास्तविक किसानों के बजाय पटवारी के निजी लोगों के बैंक खाते दर्ज किए गए। जैसे कि—

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  • सुन्दर उर्फ बिल्ला के खाते में 17,375 रुपये की जगह 40,500 रुपये ट्रांसफर किए गए।
  • सुरजीत, जिन्हें 12,033 रुपये मिलने थे, उन्हें 45,500 रुपये भेजे गए।
  • कमलजीत के जानकारों राजपाल, सुमन और राहुल के खातों में भी लाखों रुपये मुआवजा के नाम पर भेजे गए, जबकि इनका नाम लिस्ट में नहीं था।

सबूतों के साथ छेड़छाड़ और नियमों की अनदेखी

सरकारी नियमों के अनुसार, केवल बीमित और पांच एकड़ तक की फसल के लिए 9,500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाना था। लेकिन अधिकारियों ने इस नियम की खुलेआम अनदेखी की। फर्जी नाम जोड़कर, फर्जी खाते लगा कर, मुआवजा की राशि जानबूझकर जरूरत से ज्यादा भेजी गई।

मामले की जांच में यह भी सामने आया कि—

  • क्रम संख्या 1273 पर एक नाम दर्ज था लेकिन खाता किसी और का था।
  • कमलजीत के दोस्त राहुल के खातों में दो बार में 85,610 रुपये भेजे गए, जबकि उनका नाम लिस्ट में नहीं था।
  • जगदीश पुत्र ख्याली की जगह सुशील के खाते में तीन बार में कुल 1.11 लाख रुपये भेज दिए गए।

एक संगठित साजिश की तस्वीर

पूरे घोटाले में तहसील स्तर पर एक संगठित साजिश का साफ सबूत मिला है। पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तत्कालीन तहसीलदार—all ने मिलकर मुआवजा वितरण प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज बनाए, लिस्ट पर अपने हस्ताक्षर किए और बैंकों में जमा करवाकर रकम अपने परिचितों को पहुंचा दी।

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इस मामले में अब पुलिस जांच शुरू हो चुकी है और आगे और खुलासों की उम्मीद की जा रही है। वहीं, मुआवजा पाने से वंचित रह गए असली किसान अब सरकार से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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